अलसी का बीज मधुर, मंद गंधयुक्त, उष्ण, स्निग्ध, बल दायक कामोद्दीपक मूत्रकारक, शोथहर, रेचक, वातनाशक, वात रक्तनाशक, कुष्ठ, व्रण, पीठ दर्द, कफ, पित्त और दृष्टिदोष नाशक है।

हेलो दोस्तों कैसे हैं आप!  दोस्तों पिछले पोस्ट में मैंने आपको अजवाइन के लाभ यानी अजवाइन से होने वाले फायदे के बारे में बताया था। और आज के इस पोस्ट में मैं आपको अलसी से होने वाले फायदे के बारे में बताने वाला हूं। 

दोस्तों कई गंभीर बीमारियों का इलाज भी हमारे घरों में ही होता है। लेकिन बात यह है कि बस हमें जानकारी होना आवश्यक है। और इन्ही जानकारी को मैं आपके समक्ष पेश कर रहा हूं। ये  घरेलू नुस्खे एवं घरेलू उपचार प्राचीन समय से ही हमारे स्वास्थ्य में मददगार रहे हैं इसलिए आप इनका उपयोग कर सकते हैं।

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 तो अब आइए बिना देरी किए देखते हैं अलसी से होने वाले 12 गुणकारी लाभ जो मैंने आपको नीचे बताए हुए हैं।

1. अलसी के बीजों को ठंडे पानी में पीसकर लेप करने से शोध  के कारण उत्पन्न सिरदर्द, माथे की पीड़ा तथा शिरोव्रण में लाभ होता है।

2. तवे पर 50 ग्राम अलसी भून कर पाउडर बना लें। इसमें 50 ग्राम मिश्री, 10 ग्राम काली मिर्च पाउडर मिलाकर शहद के साथ घोंट ले और  2 से 6 ग्राम की गोलियां बना लें। बच्चों को 3 ग्राम की तथा बड़ों को 6 ग्राम की गोलियां सुबह सेवन करने से वात और कफ की अधिकता के कारण उत्पन्न विकारों में लाभ होता है। इसके सेवन के बाद 1 घंटे तक पानी ना पिए।

3. अलसी तथा एरंड का तेल बराबर मात्रा में मिलाकर कांसे की थाली में कांसे के पात्र से ही खूब घोटकर आंख में सुरमे की तरह लगाने से अनिद्रा रोग का नाश होकर अच्छी नींद आती है।

4. 5 ग्राम अलसी बीजों को कूट छानकर पानी में उबाल लें।इसमें 20 ग्राम मिश्री मिलाकर लें। यदि सर्दी का मौसम हो तो मिस्त्री के स्थान पर शहद मिलाएं। इस औषधि के सुबह-शाम सेवन करने से भी श्वास खांसी में लाभ होता है।

5. अलसी के 3 ग्राम बीजों को दरदरा पीस कर 250 ग्राम उबले हुए पानी में भिगो दें और 1 घंटे तक ढक कर रख दें।उसके बाद छानकर थोड़ी सी शक्कर मिलाकर सेवन करने से भी सूखी खांसी ढीली होकर स्वास रोग की घबराहट दूर होती है पेशाब खुलकर वह साफ आता है।

6. अलसी का तेल और चूने का निथरा हुआ पानी समभाग एकत्र करके अच्छी तरह से घोट ले यह मलहम जैसे हो जाता है। इसको आग से जले हुए अंगों पर लगाने से जल्दी ही पीड़ा दूर हो जाती है। प्रतिदिन एक या दो बार यह मलहम आग से जले हुए स्थान पर लगाने से शीघ्र ही लाभ होता है।

7. अलसी की पुल्टिस सब तरह से पुल्टिस में श्रेष्ठ व लाभकारी हैं। चार भाग कुटी अलसी, 10 भाग उबलते हुए पानी में डाल दें और धीरे-धीरे मिलाएं। यह पुल्टिस बहुत गाढी न करें। लगाते समय इसके उक्त भाग पर तेल चुपड़ दें। इसके प्रयोग से सूजन तथा पीड़ा दूर होती हैं।

8.  अलसी के तेल की पुल्टिस गठिया की सूजन पर लगाने से लाभ होता है।

9. दो काली मिर्च तथा एक चम्मच शहद के साथ अलसी का दो चमक पाउडर सेवन करने से वीर्य पुष्ट होकर गाना होता है। इस तरह काम शक्ति बढ़ जाते हैं।

10. वातजन्य फोड़े में यदि जलन व वेदना हो तो तिल तथा अलसी को भूनकर गाय के दूध में उबालकर ठंडा होने पर उसी दूध में उन्हें पीसकर फोड़े पर लेप करें इससे लाभ होता है।

11. अलसी के पाउडर को दूध व पानी में मिलाकर उसमें जरा सा हल्दी पाउडर डालकर खूब पका लें गरम-गरम( सहने योग्य ) बंद गांठ या कच्चे गांढ पर इस पुल्टिस का गाढा लेप कर के ऊपर से पान का पत्ता रखकर बांध दें। इस तरह से कुल 7 बार बांधने से व्रण पककर फट जाता है। जलन, टीस, पीड़ा आदि भी दूर हो जाती है।

12. अलसी 50 ग्राम, मुलेठी 3 ग्राम को दरदरा कूट कर डेड पाव पानी के साथ मिट्टी के बर्तन में धीमी आंच पर पकाएं। जब 50 ग्राम पानी शेष रह जाए तब छानकर 2 ग्राम कलमी शोरा मिला कर दो 2-2 घंटे के अंतराल से 20 20 ग्राम की मात्रा में पिलाएं। इससे बूंद बूंद मूत्र आने की शिकायत दूर होती है।अधिक मात्रा में बनाकर 15 दिन तक इसका सेवन कर सकते हैं।

दोस्तों पोस्ट को पूरा करने के लिए धन्यवाद!   इसे आगे शेयर करना न भूल जाएगा। आज के इस पोस्ट में मैंने आपको अलसी से होने वाले 12 फायदों के बारे में बताया है।  और अगले आने वाले पोस्ट में मैं आपको आवले से होने वाले लाभ के बारे में बताऊंगा।